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विवाह में देरी के ज्योतिषीय कारण!

Author: Astrologer Sandeep Kumar Posted on: June, 11, 2019

इस जीवन में सब कुछ समय से होना बहुत आवश्यक है. फिर चाहे वो शादी का मामला हो या फिर नौकरी. शादी जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव है. यह अत्यंत महत्वपूर्ण है कि हमें हर चीज को कम समय के साथ पूरा करने पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए. शादी में देरी होना जीवन में कई मुद्दों का कारण बन जाता है. भले ही हम कितनी भी मेहनत कर लें, नियति ने हमारे लिए अलग ही कहानी लिखी हुई है. समय पर शादी होने से न केवल आप खुश रहते है बल्कि समय से आपके बच्चों की परवरिश व पढाई भी हो जाती है. हर युवा व युवती को सही समय पर बंधन में बंध जाना चाहिए. हर एक व्यक्ति विवाह के लिए अपनी जी-जान लगा देता है लेकिन शादी एक सपना ही बनकर रह जाती है. काफी प्रयासों के बावजूद भी शादी न होने से लड़का व लड़की निराश हो जाते है. वास्तव में विवाह में देरी का कारण होता है ज्योतिषीय कारण.

आज इस लेख में हम आपको इन्हीं कारणों के बारे में बतायेंगे. चंडीगढ़ के वशीकरण विशेषज्ञ ज्योतिष का कहना है कि जन्म कुंडली में मौजूद ग्रह विवाह में देरी का कारण बनते है.

  1. # अगर आपकी जन्म कुंडली में मंगल 8वे घर में स्थित हों तो विवाह में देरी होती है.
  2. # युवक-युवतियों का देर से गठबंधन में बंधने का कारण सातवां स्वामी कमजोर होना. अगर सातवां स्वामी छठे व आठवें घर में स्थित हो तो यह सबसे बड़ा कारण बनता है.
  3. # अहमदाबाद के प्रेम विवाह विशेषज्ञ बताते है कि लड़की के विवाह का कारक बृहस्पति होता है जबकि लडकें की कुंडली में विवाह का कारक शुक्र होता है. यदि इन दोनों ग्रहों पर अशुभ ग्रहों की नजर हो तो शादी में अड़चन जरुर आती है.
  4. # जब चंद्रमा 7 वें घर में राहु के साथ संयोजित होता है और 7 वें स्वामी का वशीकरण होता है, तो यह भी शादी में अड़चन का कारण बनता है.
  5. # जब शनि और शुक्र ग्रह आरोही में स्थित होते हैं और मंगल 7 वें में रखा जाता है तब तक विवाह की काफी उम्र निकल जाती है.
  6. # जन्म कुंडली में शनि और शुक्र का परस्पर पक्ष होने पर विवाह में अत्यधिक विलंब हो जाता है और 8 या 12 वें में चंद्रमा रहता है.
  7. # अगर शक्तिशाली सातवां स्वामी दुसरे घर में स्थित हो तो युवावस्था में ही विवाह के योग बन जाते है.
  8. # ज्योतिष का कहना है मांगलिक पुत्र-पुत्री का विवाह भी देरी से होता है. मांगलिक लड़के व लड़की के विवाह का योग 27, 29, 31, 33, 35 व 37 वें वर्ष में बनता है.

यह बहुत ही कम मामलों में देखा जाता है कि लड़का और लड़की दोनों जीवन भर अविवाहित रहते हैं. शादी प्रकति का व्यवहार है इसलिए जीवनभर अविवाहित रहता बहुत ही दर्दनाक है. भावनात्मक संबंध और सह-संबंध दोनों मानसिक और जैविक आवश्यकता है. कुछ भी कर लो भाग्य का लिखा कोई नहीं बदल सकता है. अविवाहित अवस्था अभिशाप बन जाता है. अंतिम सांस तक जीवन कष्टमय बन जाता है. लेकिन ज्योतिषीय उपायें अपनाकर कभी कभी योग बनायें जा सकते है.

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About Astrologer Sandeep Kumar

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